आरक्षण - लघुकथा
लघुकथा आरक्षण बात बहुत कुछ पुरानी ही है । लगभग अट्ठाईस साल पहले की । भारत के गोदावरी नदी के किनारे बसे गांव की । गांव गोदावरी और वाण नदी के संगम पर बसा हुआ था । इसलिए इस गांव का नाम वाणीसंगम है । गांव नदी किनारे ढलान पर इस तरह बसा हुआ था कि मान लो कोई भागते हुए नदी की ओर निकले तो नदी के बहाव में गिरने से अपने आप को नहीं रोक सकता था । नदी के भी दो हिस्से बनाये गये थे । नदी का नीचले छोर का उपयोग बौद्ध , कुम्हार , कोली तथा अन्य पिछडी जाति के लोग करते थे । हैंडपंप बिगड जाने पर सबकी मायें, बहनें या फिर दादियां नदी के नीचले हिस्से के बहाव से पानी लाती । इस ओर ही अंतिम संस्कार का कार्यक्रम किया जाता । गोदावरी नदी की तथाकथित पावनता के चलते पडोस के तहसिल के लोग भी इसी जगह मूर्दों को ले ...